
रुद्रप्रयाग: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल मार्गदर्शन में उत्तराखंड सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न जनकल्याणकारी और स्वरोजगार योजनाओं का असर अब धरातल पर साफ दिखने लगा है। इन योजनाओं का लाभ उठाकर राज्य के किसान और पशुपालक न सिर्फ अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं, बल्कि आत्मनिर्भरता की एक नई इबारत भी लिख रहे हैं। सरकार के इन गंभीर प्रयासों से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के बेहतरीन मौके पैदा हो रहे हैं, जो पहाड़ों के लिए सबसे बड़े वरदान यानी ‘रिवर्स पलायन’ (शहरों से वापस गांव लौटने) को लगातार बढ़ावा दे रहे हैं।
जब शहर की भागदौड़ छोड़ दिनेश लौटे अपने गांव
पहाड़ में रहकर कामयाबी की एक ऐसी ही खूबसूरत और प्रेरणादायक कहानी लिख रहे हैं जनपद रुद्रप्रयाग के लदोली गांव के रहने वाले दिनेश सिंह चौधरी। वर्ष 2021 में दिनेश ने शहरों की भागदौड़ और तनावभरी जिंदगी को हमेशा के लिए अलविदा कहने का एक बड़ा फैसला लिया। वे अपने गांव वापस लौटे और यहां उन्होंने ‘ट्राउट मत्स्य पालन’ (टैंकों में मछली पालन) को स्वरोजगार के रूप में चुना। अपनी कड़ी मेहनत के दम पर आज वे न केवल सफलतापूर्वक ट्राउट मछली का बंपर उत्पादन कर रहे हैं, बल्कि उन्होंने अपनी खुद की हैचरी भी स्थापित कर ली है जहां वे ट्राउट की ब्रीडिंग (प्रजनन) का काम खुद संभालते हैं।
मेहनत दिनेश की, मजबूत सहारा बना मत्स्य विभाग
दिनेश की इस कामयाबी के पीछे उनके हौसले के साथ-साथ सरकारी योजनाओं का भी एक बड़ा और मजबूत हाथ रहा:
खुद का निवेश: दिनेश सिंह चौधरी ने इस आधुनिक मत्स्य पालन इकाई को खड़ा करने में 60 प्रतिशत पूंजी का निवेश खुद की जेब से किया।
सरकारी सब्सिडी: उनकी इस बड़ी पहल को रफ्तार देने के लिए मत्स्य विभाग ने विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से 40 प्रतिशत की भारी वित्तीय सहायता (अनुदान) उपलब्ध कराई।
विभागीय अधिकारियों के तकनीकी सहयोग और खुद के पसीने की बदौलत दिनेश ने बहुत कम समय में इस व्यवसाय को एक सफल मॉडल में तब्दील कर दिया।
‘प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना’ ने बदले दिन
मत्स्य विभाग की जिला प्रभारी श्रीमती मंजू भाकुनी ने दिनेश की इस अनूठी सफलता पर गर्व व्यक्त करते हुए बताया कि लदोली गांव के दिनेश सिंह चौधरी को केंद्र व राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना’ के तहत विभागीय सहायता दी गई थी। इस योजना का पूरा लाभ उठाने के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज वे न सिर्फ शानदार मत्स्य उत्पादन कर रहे हैं, बल्कि हर महीने एक बेहतरीन और सम्मानजनक मुनाफा भी कमा रहे हैं।
उन्होंने आगे साझा किया कि मत्स्य विभाग का यह निरंतर प्रयास रहता है कि पहाड़ के युवाओं और किसानों को समय-समय पर सरकारी योजनाओं की सटीक जानकारी, आधुनिक तकनीकी मार्गदर्शन और जरूरी आर्थिक मदद दी जाए, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस मुनाफे वाले क्षेत्र से जुड़कर अपने ही घर पर स्वरोजगार खड़ा कर सकें।
सालाना 5 लाख तक की कमाई, युवाओं के लिए बने रोल मॉडल
आज के समय में दिनेश सिंह चौधरी तमाम खर्चों को काटकर इस व्यवसाय से हर साल लगभग 4 से 5 लाख रुपये की शुद्ध आय कमा रहे हैं। उनकी यह शानदार सफलता इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि अगर सरकार की नीतियों का सही ढंग से इस्तेमाल किया जाए और मन में कुछ कर गुजरने का पक्का इरादा हो, तो पहाड़ों की वादियों में रहकर भी अपने परिवार के बीच एक बेहद शानदार और आत्मनिर्भर जीवन जिया जा सकता है। दिनेश की यह ‘सफलता की कहानी’ आज उत्तराखंड के उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा का सबसे बड़ा जरिया बन चुकी है, जो रोजगार की तलाश में बड़े शहरों की ओर पलायन करने की सोच रहे हैं।



